सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

hariyalo rajasthan अभियान राजस्थान ! जाने

हरियालो राजस्थान योजना राजस्थान सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य राज्य को हरित और सुंदर बनाना है। इस योजना के तहत, राज्य सरकार वृक्षारोपण, जल संचयन और अन्य पर्यावरण संबंधी कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। *मुख्य उद्देश्य:* - राज्य में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और वन क्षेत्र को बढ़ाना - जल संचयन और जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना - पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम करना - राज्य को सुंदर और हरित बनाना *कार्यक्रम और गतिविधियाँ:* - वृक्षारोपण अभियान: राज्य सरकार वृक्षारोपण अभियान चला रही है, जिसमें लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। - जल संचयन: राज्य सरकार जल संचयन के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है, जैसे कि वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण। - पर्यावरण संरक्षण: राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है, जैसे कि प्रदूषण नियंत्रण और वन संरक्षण। *लाभ:* - राज्य को हरित और सुंदर बनाने में मदद मिलेगी - पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी - जल संचयन और जल संरक्षण में मदद मिलेगी - लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागर...

Brahman : full story (ब्राह्मण परिचय)

ब्राह्मण
विप्र
ब्राह्मण (आचार्य, विप्र, द्विज, द्विजोत्तम) यह वर्ण व्‍यवस्‍था का सर्वोच्च वर्ण है। एेतिहासिक रूप हिन्दु वर्ण व्‍यवस्‍था में चार वर्ण होते हैं। ब्राह्मण (आध्यात्मिकता के लिए उत्तरदायी), क्षत्रिय (धर्म रक्षक), वैश्य (व्यापारी) तथा शूद्र(सेवक, श्रमिक समाज)।
यस्क मुनि की निरुक्त के अनुसार - ब्रह्म जानाति ब्राह्मण: -- ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म (अंतिम सत्य, ईश्वर या परम ज्ञान) को जानता है। अतः ब्राह्मण का अर्थ है - "ईश्वर का ज्ञाता"।
यद्यपि भारतीय जनसंख्या में ब्राह्मणों का प्रतिशत कम है, तथापि धर्म, संस्कॄति, कला तथा शिक्षा के क्षेत्र में इनका योगदान अपरिमित है
ब्राह्मण महत्ता : ब्राह्मण समाज का इतिहास प्राचीन भारत के वैदिक धर्म से आरंभ होता है। "मनु-स्मॄति" के अनुसार आर्यवर्त वैदिक लोगों की भूमि है। ब्राह्मण व्यवहार का मुख्य स्रोत वेद हैं। ब्राह्मणों के सभी सम्प्रदाय वेदों से प्रेरणा लेते हैं। पारंपरिक तौर पर यह विश्वास है कि वेद अपौरुषेय (किसी मानव/देवता ने नहीं लिखे) तथा अनादि हैं, बल्कि अनादि सत्य का प्राकट्य है जिनकी वैधता शाश्वत है। वेदों को श्रुति माना जाता है (श्रवण हेतु, जो मौखिक परंपरा का द्योतक है)।

धार्मिक व सांस्कॄतिक रीतियों एवं व्यवहार में विवधताओं के कारण और विभिन्न वैदिक विद्यालयों के उनके संबन्ध के चलते, आचार्य हीं ब्राह्मण हैं आज समाज में विभिन्न उपजातियों में विभाजित है। सूत्र काल में, लगभग १००० ई.पू से २०० ई॰पू॰, वैदिक अंगीकरण के आधार पर, ब्राह्मण विभिन्न शाखाओं में बटने लगे। प्रतिष्ठित विद्वानों के नेतॄत्व में, एक ही वेद की विभिन्न नामों की पृथक-पृथक शाखाएं बनने लगीं। इन प्रतिष्ठित ऋषियों की शिक्षाओं को सूत्र कहा जाता है। प्रत्येक वेद का अपना सूत्र है। सामाजिक, नैतिक तथा शास्त्रानुकूल नियमों वाले सूत्रों को धर्म सूत्र कहते हैं, आनुष्ठानिक वालों को श्रौत सूत्र तथा घरेलू विधिशास्त्रों की व्याख्या करने वालों को गॄह् सूत्र कहा जाता है। सूत्र सामान्यतः पद्य या मिश्रित गद्य-पद्य में लिखे हुए हैं।
ब्राह्मण शास्त्रज्ञों में प्रमुख हैं अग्निरसअपस्तम्भअत्रिबॄहस्पतिबौधायनदक्षगौतमवत्स,हरितकात्यायनलिखितमनुपाराशरसमवर्तशंखशत्तपऊषानसवशिष्ठविष्णुव्यासयज्ञवल्क्य तथा यम। ये इक्कीस ऋषि स्मॄतियोंके रचयिता थे। स्मॄतियों में सबसे प्राचीन हैं अपस्तम्भ, बौधायन, गौतम तथा वशिष्ठि।
उपजाति ब्राह्मण :
ब्राह्मणों को सम्पूर्ण भारतवर्ष में विभिन्न उपनामों से जाना जाता है, जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश में त्रिवेदी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान के कुछ भागों में खाण्डल विप्र, ऋषीश्वर (GOUR),वशिष्ठ, सनाढ्य ब्राह्मणत्यागी अवध (मध्य उत्तर प्रदेश) तथा मध्यप्रदेश के बुन्देलखंड से निकले जिझौतिया ब्राह्मण,रम पाल मध्य प्रदेश में कहीं कहीं वैष्णव (बैरागी)(, बाजपेयी, बिहार व बंगाल में भूमिहार, जम्मू कश्मीर, पंजाब व हरियाणा के कुछ भागों में महियाल, मध्य प्रदेश व राजस्थान में गालव, गुजरात में श्रीखण्ड,भातखण्डे अनाविल, महाराष्ट्र के महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण, मुख्य रूप से देशस्थ, कोंकणस्थ , दैवदन्या, देवरुखे और करहाड़े है. ब्राह्मणमें चितपावन एवं कार्वे, कर्नाटक में अयंगर एवं हेगडे, केरल में नम्बूदरीपाद, तमिलनाडु में अयंगरएवं अय्यर, आंध्र प्रदेश में नियोगी एवं राव, उड़ीसा में दासएवं मिश्र आदि, बिहार में मैथिल ब्राह्मण आदि तथा राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बिहार में शाकद्वीपीय(मग)कहीं उत्तर प्रदेश में जोशी जाति भी पायी जाती है। [1]आदि।

ब्राह्मणों में कई जातियां है।इससे मूल कार्य व स्थान का पता चलता है सामवेदी=ये सामवेद गायन करने वाले लोग थे इसमे सभी वर्णो के व्यक्ति सम्मिलित थे।ये राजाओ के यहाँ गायकी का कार्य करते थे।कालांतर में ये ब्राह्मण हो गए। अग्निहोत्री =अग्नि में आहुति देने वाला।इसमे सभी जातियों के लोग सम्मिलित थे ।क्योंकि शूद्रों को छोड़ कर अन्य सभी जातियों को अग्निहोत्र करना आवश्यक था। त्रिवेदी=वे लोग जिन्हें तीन वेदों का था ज्ञान वे त्रिवेदी है चतुर्वेदी=जिन्हें चारों वेदों का ज्ञान था।वेलोग चतुर्वेदी हुए। वेदी=जिन्हें वेदी बनाने का ज्ञान था वे वेदी हुए। 
खानपान :
ब्राह्मण मांस शराब का सेवन जो धर्म के विरुद्ध हो वो काम नहीं करते हैं। ब्राह्मण सनातन धर्म के नियमों का पालन करते हैं। जैसे वेदों का आज्ञापालन, यह विश्वास कि मोक्ष तथा अन्तिम सत्य की प्राप्ति के अनेक माध्यम हैं, यह कि ईश्वर एक है किन्तु उनके गुणगान तथा पूजन हेतु अनगिनत नाम तथा स्वरूप हैं जिनका कारण है हमारे अनुभव, संस्कॄति तथा भाषाओं में विविधताएं। ब्राह्मण सर्वेजनासुखिनो भवन्तु(सभी जन सुखी तथा समॄद्ध हों) एवं वसुधैव कुटुम्बकम(सारी वसुधा एक परिवार है) में विश्वास रखते हैं। सामान्यत: ब्राह्मण केवल शाकाहारी होते हैं (बंगाली, उड़ीया तथा कुछ अन्य ब्राह्मण तथा कश्मीरी पन्डित इसके अपवाद हैं)।



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

क्यों तैरते है पानी में जहाज़ : science facts

      विज्ञान की दुनिया अनोखी और रोचक है , आप इसके बारे में जितना जानो कम ही है ।      जहाज़ इतने बड़े और लोहे के बने होते है और इनका वजन कई टन में होता है लेकिन आप देखते है ये नदी हो य...

क्या चाँद पर वायुमंडल है ?? : Interesting Science facts

          _____चाँद पर वायुमंडल_____    विज्ञान की दुनिया अनोखी और रोचक है यह जितनी देखी खोजी जाती है उतना ही इसमें विस्तार आता जाता है यह उसी तरह है जेसे हम रेत के पर्वत का एक कण उठा रहे हो । विज्ञान जितना मजेदार और रोचक है उतना समझने वाला विषय भी है तो आज का विषय है अपने "चाँद का वायुमंडल" |           हा तो क्या वायुमंडल है ? अगर है तो वह दिखाई क्यों नही देता है और अगर नही है तो उसके पीछे का वैज्ञानिक कारण क्या है ?? यही सब आज हम जानेंगे !!            पहले तो आप सब को पता होगा की वायुमंडल है क्या 'वायुमंडल एक गैसों का समूह है जो ग्रह के चारो और मौजूद रहता है और एक परत बनाता है और वह परत घनत्व में अलग अलग होती है जेसे जेसे हम वायुमंडल में घुसते चले जाते है वह परत उतनी सघन होती चली जाती है  जेसे आप समझ ही गए होंगे की जेसे जेसे धरती के ऊपर जाते है हवा की सघनता घटती जाती है क्योकि वहाँ कई गेंस मौजूद नही रहती है जेसे 'ऑ...

बर्फ पानी में तैरती है : इसके पीछे का science

_______ बर्फ का तैरना ______ आप ने देखा होगा अगर बर्फ की सिल्ली को पानी में डाला जाता है तो वो अन्य पत्थर या पदार्थो की तरह डूबती नही है पानी पर तैरती रहती है तो आप सोचते होंगे इस के पीछे का विज्ञान क्या है तो आज आपको उसी का जवाब मिलेगा ।    why we see blue sky जाने   तो पहले आपको पता होना चाइए की बर्फ की संरचना केसी है तो बता देता हु बर्फ की संरचना 'पिंजरेनुमा' आक्रति की होती है जेसे पिंजरे में जालिया होती है उसी तरह बर्फ में भी जाली होती है । अब आप सोचेगे ये कोई जवाब थोड़ी हुआ    तो आपको पहला चरण पूरा हुआ की बर्फ की आकार का ज्ञान हो गया अब एक और विज्ञानं की बात है जो अभी मेने नही बताई है वह है 'घनत्व'। 'किसी एकांक आयतन में उपस्तिथ द्रव्यमान घनत्व कहलाता है' तो अगर किसी एकांक आयतन 1cm3 में 3 अणु है वही किसी 1cm3 में 8 अणु मौजुद है तो 8 अणु वाली आयतन का घनत्व 3 अणु वाले से ज्यादा है , तो आप जान गए होंगे की घनत्व क्या है ' अब बात आती है की ये सब में क्यों बता रहा हु तो जो बर्फ है उसका घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है अतः वह पानी की सतह...