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hariyalo rajasthan अभियान राजस्थान ! जाने

हरियालो राजस्थान योजना राजस्थान सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य राज्य को हरित और सुंदर बनाना है। इस योजना के तहत, राज्य सरकार वृक्षारोपण, जल संचयन और अन्य पर्यावरण संबंधी कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। *मुख्य उद्देश्य:* - राज्य में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और वन क्षेत्र को बढ़ाना - जल संचयन और जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना - पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम करना - राज्य को सुंदर और हरित बनाना *कार्यक्रम और गतिविधियाँ:* - वृक्षारोपण अभियान: राज्य सरकार वृक्षारोपण अभियान चला रही है, जिसमें लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। - जल संचयन: राज्य सरकार जल संचयन के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है, जैसे कि वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण। - पर्यावरण संरक्षण: राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है, जैसे कि प्रदूषण नियंत्रण और वन संरक्षण। *लाभ:* - राज्य को हरित और सुंदर बनाने में मदद मिलेगी - पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी - जल संचयन और जल संरक्षण में मदद मिलेगी - लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागर...

किसने बनाया इंसान को अंतरिक्ष में इतना सफल : infinity studies



सोवियत संघ ने अपना पहला अंतरिक्ष मिशन sputnik 1 सफलता पूर्वक लॉच कर लिया था। लेकिन इसमें कोई भी जिन्दा आदमी या जानवर नहीं था।

इस बार वे किसी प्राणी को अंतरिक्ष में भेजना चाहते थे। उन्होंने एक डॉग को भेजने का मन बनाया। इस मिशन का नाम sputnik 2 रखा। इसके लिए उन्होंने एक ३ साल की मादा डॉग को चुना , जिसका नाम लाइका था। उन्होंने जान बुझ कर आवारा डॉग को चुना क्योंकि वह चुनौती भरे वातावरण में अपने को ढाल सकती थी।

लेकिन वैज्ञानिकों ने इस मिशन पर जल्दी जल्दी काम किया। लाइका के स्पेसक्राफ्ट को जल्दी में बनाया गया। सिर्फ २८ दिन में तैयार कर लिया। ये स्पेसक्राफ्ट काफी छोटा था इसमें घुस कर लाइका घूम नहीं सकती यहां तक की वह ज्यादा हिल डुल नहीं सकती थी।

लाइका को भेजने लायक बनाने के लिए २० दिन तक एक छोटे पिंजरे में कैद करके रखा गया और अंतरिक्ष में रहना सीखने की कोशिश की गई ताकि वह स्पेसक्राफ्ट में रहना सीख जाए। उसके स्पेसक्राफ्ट में कार्बन डाई को सोख लेने वाला व ऑक्सीजन बनाने वाला सिलिंडर और उस को ठंडा रखने के लिए एक पखा था कुछ खाने पीने का समान था।

स्पेसक्राफ्ट जल्दी में बना था इसलिए लॉन्च होने के बाद ही उसमे तकनीकी खराबी आ गई और उसका एक हिस्सा काम नहीं किया। लगभग 5 घंटे बाद ही लाइका के सिग्नल आने बंद हो गए थे।

स्पेसक्राफ्ट १६२ दिन स्पेस में ही था और 14 अप्रैल 1958 धरती के वातावरण में आते समय मरी हुई लाइका के साथ जलकर खत्म हो गया।

इस तरह लाइका ने त्याग किया और उसे हमेशा याद किया जायगा।

लाइका की मौत के बाद सोवियत संघ अंतरिक्ष में डॉग को भेजता ही रहा और इसके लिए वह अपने रॉकेट को सुरक्षित बनाता गया।

1960 में स्ट्रेलका और बेलका नाम के कुत्तों को अंतरिक्ष में भेजा गया। यह दोनों कुत्ते पहली बार सुरक्षित वापस लौटे।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी 1958 में गोर्डो नाम के बंदर को अंतरिक्ष में भेजा परंतु उसकी मौत हो गई।

वही नासा ने साल 1959 में बेकर और एबल नाम के दो बंदरों को अंतरिक्ष में फिर भेजा यह दोनों सुरक्षित वापस लौट आए।

सैम नाम के बंदर पर अंतरिक्ष यात्रियों को जिंदा रखने वाले कैप्सूल का टेस्ट हुआ और सैम इसमें पास हो गया।

फिर हेम नाम का चिंपांजी पहली बार अंतरिक्ष में भेजा गया। इसकी मदद से पता चला कि भार हीनता में शरीर कैसे काम करता है।

इसके बाद इंसानों को अंतरिक्ष में भेजना शुरू किया गया।

लेकिन ऐसा नहीं है कि जीवो को अब अंतरिक्ष में भेजा नहीं जा रहा।

साल 2007 में यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने टाडीग्रेड के सूक्ष्म जीवों को अंतरिक्ष में भेजा और वह 12 दिन तक जिंदा रवैज्ञानिकों के अथक प्रयास और layyaka के बलिदान ने और अन्य जानवरों के सहनशीलता ने अंतरिक्ष में इतना आगे पहुँचाया है।

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