सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

hariyalo rajasthan अभियान राजस्थान ! जाने

हरियालो राजस्थान योजना राजस्थान सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य राज्य को हरित और सुंदर बनाना है। इस योजना के तहत, राज्य सरकार वृक्षारोपण, जल संचयन और अन्य पर्यावरण संबंधी कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। *मुख्य उद्देश्य:* - राज्य में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और वन क्षेत्र को बढ़ाना - जल संचयन और जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना - पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम करना - राज्य को सुंदर और हरित बनाना *कार्यक्रम और गतिविधियाँ:* - वृक्षारोपण अभियान: राज्य सरकार वृक्षारोपण अभियान चला रही है, जिसमें लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। - जल संचयन: राज्य सरकार जल संचयन के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है, जैसे कि वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण। - पर्यावरण संरक्षण: राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है, जैसे कि प्रदूषण नियंत्रण और वन संरक्षण। *लाभ:* - राज्य को हरित और सुंदर बनाने में मदद मिलेगी - पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी - जल संचयन और जल संरक्षण में मदद मिलेगी - लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागर...

ERCP PROJECT " पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना know about this biggest project

ERCP परियोजना, या पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना, राजस्थान सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसका उद्देश्य चंबल नदी और उसकी सहायक नदियों के अधिशेष जल को राज्य के उन क्षेत्रों में पहुंचाना है जहां पानी की कमी है। यह परियोजना राजस्थान के 13 जिलों को पेयजल और सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराएगी, जिसमें झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, करौली, अलवर, भरतपुर, दौसा और धौलपुर शामिल हैं।

*परियोजना के मुख्य बिंदु:*

- *उद्देश्य:* अधिशेष जल का बेहतर उपयोग करना और राज्य के विभिन्न हिस्सों में पानी की कमी को दूर करना।
- *लाभ:* पेयजल और सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता, भूजल स्तर में वृद्धि, कृषि उत्पादन में वृद्धि, और सामाजिक और आर्थिक विकास।
- *अनुमानित लागत:* लगभग 40,000 करोड़ रुपये।
- *राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा:* राजस्थान सरकार ने इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की मांग की है, जिससे केंद्र सरकार से 90% वित्त पोषण प्राप्त हो सके।

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2024 में राजस्थान में पानी की कमी को दूर करने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना PKC-ERCP का शिलान्यास किया, जिसकी लागत लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यह परियोजना अगले 7-8 वर्षों में पूरी होगी और राजस्थान के 21 जिलों के लोगों को लाभ पहुंचाएगी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जैसलमेर के ऐतिहासिक जैन मंदिर Jain Temples of Jaisalmer

राजस्थान की धरती क्षत्रिय की धरती रही है और कण कण में स्वाभिमान और मिट्टी के प्रति प्रेम है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से कुछ 400 से 500 km की दूरी पर राजस्थान के सोने की नगरी यानी स्वर्णनगरी जैसलमेर स्थित है जो भाटी राजपूतों की रियासत थी। इस सिटी का नाम स्वर्णनगरी इसके पीले संगमरमर से बने आलीशान महलों इमारतों से हुआ है इस शहर में सभी घर पीले संगमरमर से बने है जो चमकती धूप में सोने का अहसास दिलाते है। भाटी राजाओं ने आज से 865 साल पहले इसे बसाया और सोनार किला बनवाया । सोनार किला के भीतर जैन टेंपल और अन्य कई हवेलियां है और इस किले के भीतर एक पूरा शहर बसा है यह राजस्थान का दूसरा बड़ा किला है।  Jain Temples of Jaisalmer - Jain Mandir Jaisalmer fort YouTube video पतली पतली इसकी गलियों से होते हुए जैन टेंपल के समूह आता है जो अपनी नक्काशी , स्थापत्य और मूर्तिकला के लिए जाना जाता है इसकी स्थापत्य और भवन निर्माण अदभुत है यह भगवान महावीर जी का मंदिर है और इसकी स्थापत्य देखते ही बनती है। इन मंदिरों का निर्माण 400 से 600 साल के बीच माना जाता है। यह मंदिर किले के दर्शनीय स्थलों में ...

आखिर क्यों राजपुताना राज़ को अंग्रेज़ो से करनी पड़ीं संधि ?? : infinity studies

  राजस्थान वीर सपूतों की जन्मभूमि है  और यहाँ ऐसेऐसे वीर योद्धाओं ने जन्म लिया है जिन्होंने अपने मातृभूमि और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण तक की आहुति दी है।  राजस्थान जहाँ वीर सपूत बाप्पा रावल , सम्राट पृथ्वीराज चौहान ,राणा हम्मीर, रावल रतन  सिंह, महान राणा कुंभ, परम श्रेठ राणा संग्राम सिंह, महाराज मालदेव, वीर दुर्गादास राठौर जेसे  महावीर पराक्रमी अपनी जन्मभूमि को  प्राणों से प्रिय मानने वाले पुण्य आत्माओं ने अपने खून से सींचा हैं ।   ऐसे वीर सपूतो की भूमि आखिर क्यों अंग्रेज़ो के संधि की भेंट हुई। राजपुताना की संधि :   राजपुताना जब मेवाड़ ,जयपुर और जोधपुर, के राजा जो मुग़ल के साथ थे तब तक यह शांति  थी परंतु जब मुग़ल की केंद्रीय सत्ता का लोप औरंगज़ेब के पश्चात  अंत हुआ तो ये सव्तंत्र राज़ को प्राप्त हुये तब तक यह सही था परंतु तभी एक और केंद्रीय सत्ता मराठा  आगमन हुआ और यह राज़ की एक  परिभाषा गढ़ने वाले थे और इन्होंने राजस्थान में ऐसा हस्तक्षेप किया की राजस्थान की सारी जनता यहाँ तक की राजाओं को एक ऐसी संधि की और व...