सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

hariyalo rajasthan अभियान राजस्थान ! जाने

हरियालो राजस्थान योजना राजस्थान सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य राज्य को हरित और सुंदर बनाना है। इस योजना के तहत, राज्य सरकार वृक्षारोपण, जल संचयन और अन्य पर्यावरण संबंधी कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। *मुख्य उद्देश्य:* - राज्य में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और वन क्षेत्र को बढ़ाना - जल संचयन और जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना - पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम करना - राज्य को सुंदर और हरित बनाना *कार्यक्रम और गतिविधियाँ:* - वृक्षारोपण अभियान: राज्य सरकार वृक्षारोपण अभियान चला रही है, जिसमें लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। - जल संचयन: राज्य सरकार जल संचयन के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है, जैसे कि वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण। - पर्यावरण संरक्षण: राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है, जैसे कि प्रदूषण नियंत्रण और वन संरक्षण। *लाभ:* - राज्य को हरित और सुंदर बनाने में मदद मिलेगी - पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी - जल संचयन और जल संरक्षण में मदद मिलेगी - लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागर...

इंदिरा रसोई योजना क्या है ?? : राजस्थान सरकार की योजना के बारे में जाने [ indira Rasoi Yojna ]

राजस्थान सरकार ने शुरू की इंदिरा रसोई योजना, जानें इस योजना के बारे में

इस योजना का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को दो समय का शुद्ध पौष्टिक भोजन रियायती दर से उपलब्ध कराया जाना है. योजना के संचालन में स्थानीय गैर सरकारी संगठनों (NGO) की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी.

राजस्थान सरकार ने 20 अगस्त 2020 को इंदिरा रसोई योजना की शुरुआत की. राजस्थान सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी की जयंती के मौके पर 20 अगस्त 2020 को इंदिरा रसोई योजना की शुरूआत की. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ''कोई भूखा नहीं सोए'' सोच के तहत वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस योजना की शुरूआत की.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस योजना की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि इंदिरा रसोई योजना प्रदेश की एक ऐसी अनूठी योजना है. इस योजना में शहरी गरीब परिवारों को पौष्टिक भोजन रियायती दर पर मिलेगा. इस योजना के तहत कोई भी जरूरतमंद महज 8 रुपये में पौष्टिक एवं स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले सकेगा.

योजना का मुख्य उद्देश्य -

इस योजना का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को दो समय का शुद्ध पौष्टिक भोजन रियायती दर से उपलब्ध कराया जाना है. योजना के संचालन में स्थानीय गैर सरकारी संगठनों (NGO) की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी एवं सूचना प्रौद्योगिकी की सहायता से प्रभावी तरीके से निगरानी होगी. इस योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को शुद्ध और पौष्टिक नाश्ता और खाना रियायती दरो पर उपल्बध करवाया जाएगा.

योजना के बारे में मुख्य बातें -

• राजस्थान सरकार ने 8 रुपये में भरपेट खाने की नई योजना प्रदेश के 213 नगरीय निकायों में 358 रसोई के साथ शुरू की है.

• इस योजना में रसोई की जगह बैठकर भोजन करने की व्यवस्था होगी. प्रत्येक रसोई में सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे और खाने वालों की तस्वीरें भी खींची जाएंगी.

• इंदिरा रसोई योजना के तहत 8 रूपए में 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 250 ग्राम चपाती एवं आचार उपलब्ध कराया जाएगा.

• जिला स्तर पर खाने के मैन्यू में फेरबदल किया जा सकेगा. प्रदेश के शहरों में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल जैसी जगहों पर पहले दौर में इसे शुरू किया गया है.

• राज्य सरकार प्रति थाली सरकार 12 रुपये का अनुदान दे रही है और 8 रुपये खाने वाले को देना पड़ेगा यानी 20 रुपये की एक थाली होगी.

• इस योजना के तहत रोजाना 1 लाख 34 हजार और पूरे साल में 4 करोड़ 87 लाख लोगों को भोजन कराने का लक्ष्य रखा गया है.

• योजना पर प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

खाना खाने का समय -

योजना के तहत दोपहर का खाना सामान्यतः सुबह 8.30 बजे से 1 बजे तक और रात का खाना शाम 5 बजे से 8 बजे तक मिल सकेगा. भोजन करने के लिए किसी भी प्रकार के दस्तावेज की कोई आवश्यकता नहीं है. कोई भी व्यक्ति 8 रुपए में भोजन की थाली प्राप्त कर सकता है.

ऑनलाइन अवलोकन -

इस योजना के तहत ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी और मोबाइल पर कूपन की सूचना देनी होगी. शुरुआत में हर निगम क्षेत्र में 300 लोगों को, नगर परिषद और पालिका क्षेत्र में 150 लोगों को सुबह-शाम खाना खिलाया जाएगा. रसोई योजना जयपुर में 20 स्थानों पर शुरू की गई है.

मुख्यमंत्री ने क्या कहा -

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि 'इस योजना की शुरुआत शहरी इलाकों से की जा रही है, लेकिन अगर जरूरत हुई और स्वयंसेवी संस्थाएं आगे आईं तो राज्य के कस्बों व गांवों में भी इस योजना का विस्तार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

क्या दूसरे ग्रह के लोग धरती पर मौजूद है या थे ??

विज्ञान की दुनिया एक असीम असंख्य सीमा का ज्ञान है , जहा जा पाना और उसे पा पाना उसी तरह असंभव सा लगता है जैसे सूरज के पास जा पाना ।  अब आज का विज्ञान ब्रह्मांड के दूसरे संजीवो को खोजने में लगा है,और धरती के लगभग सभी अंतरिक्ष अनुसंधान वाले मंगल तक पहुंच चुके है । लेकिन अभी भी एलियन की खोज होना बाकी है जिसे अभी कपोल कल्पना ही माना है लेकिन सोचने की बात ये है की धरती पर मानव है उसी तरह इस ब्रह्मांड की कोई और धरती होगी और वहा के वासी भी होगे । और हो सके तो उनकी पहुंच अपनी धरती तक हो गई हो जो हमारे बीच ही रह रहे हो जैसे की जासूस ?? क्या जाने इसमें कितनी सचाई है या मेरी कल्पना बाकी उनकी कहानियां इन दिनों बहुत सी जगह सुनने में आती है सबसे ज्यादा अमेरिका तो क्या अमेरिका के एलियन से कोई संबंध या एलियन का उस धरती से सीधा जुड़ाव लगता है। सुनने में हैरान करता है की वहा की फिल्मों में इस तरह की चीज़े दिखाई गई है जैसे की "Men in black" और "Stranger things" में । बाकी आप अपनी राय जरूर बताएं ।

क्या सींग काटने से बचेंगे गेण्डे ?? ( South Africa dehorns dozens of Rhino to save them )

________ ◆इंसानी लालच के शिकार गेण्डे ◆_____ कोरोना के कारण वातावरण शुद्ध होने का समय मिला है और नदिया साफ होने लगी है और इंसानो को भी अपनी  गलतियां नज़र आने लगी है , परंतु एक जीव है जो lockdown की वजह से खतरे की कगार पर है । 'गेंडा' जी हां ये जिव लुप्तप्राय श्रेणी का जीव है और इस गेण्डे की संख्या अफ्रीका में 5600 के बराबर है । ये जिव जो की धरती का 3 करोड साल पुराना वासी है आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है।  आखिर क्यों?? को गेण्डे धरती पर लुप्त होने की कगार पर आ चुके है। इसका कारण है 'इंसानी लालच' गैंडो का शिकार - गेण्डे भारत में पाये जाते हैं और साथ में अफ्रीका में भी मौजूद है पर दोनों जगह ये लुप्त होने को  है इसका कारण है 'इंसानी शिकार' और उनका लालच । बीते वर्षो में हज़ारो गैंडो को सिर्फ उनके सींगो के लिए मार दिया जाता है क्यों गेण्डे के सींग 45 लाख रुपये किलो के बिकते है और शिकारी इस लिए गैंडो का शिकार करते है।  भारत और अफ्रीका में गैंडो के शिकार सिर्फ सींग के लिए होता है और सिंग से दवाइयों और सजावटी समान बनाया जाता है ज...

एलियन है या नही !! नासा की खोज

परग्रही जीव या जिन्हे हम एलियन कहते है उनके बारे में सभी जानना चाहते है और सभी बड़ी एजेंसियां जो संसार में जीवन की तलाश में है लगी हुई है की वास्तव में इस तरह का जीवन धरती के अलावा कोई और जगह भी हो सकता है या नही।  लेकिन विज्ञान के मूलभूत नियम की मानव को जीने के लिए पानी और ऑक्सीजन की आवश्यकता है तो क्या परग्रही को भी जीने के लिए इसकी आवश्कता होगी?? मेरे मायने में नही क्योंकि वह अगर ऐसे ग्रह पर हो जहा का वातावरण इस तरह का हो जहा न पानी हो न ऑक्सीजन तब भी जीवन की ऐसी खोज निकल जाए जो अनुकलन प्राप्त कर चुकी हो कहने को असंभव लगे लेकिन होने में हो सकता है। यह भी पढ़े हमसे प्रकाश वर्षो की दूरी पर जहा हम सिर्फ बड़े बड़े टेलिस्कोप से जा सकते हो वहा जीवन की तलाश करना असंभव सा लगता है लेकिन हमे जाना है तो कुछ असंभव ही संभव करना होगा जैसे की इंटरस्टेलर मूवी जो स्पेस जीवन की मिसाल है में हुवा ।