सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

hariyalo rajasthan अभियान राजस्थान ! जाने

हरियालो राजस्थान योजना राजस्थान सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य राज्य को हरित और सुंदर बनाना है। इस योजना के तहत, राज्य सरकार वृक्षारोपण, जल संचयन और अन्य पर्यावरण संबंधी कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। *मुख्य उद्देश्य:* - राज्य में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और वन क्षेत्र को बढ़ाना - जल संचयन और जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना - पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम करना - राज्य को सुंदर और हरित बनाना *कार्यक्रम और गतिविधियाँ:* - वृक्षारोपण अभियान: राज्य सरकार वृक्षारोपण अभियान चला रही है, जिसमें लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। - जल संचयन: राज्य सरकार जल संचयन के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है, जैसे कि वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण। - पर्यावरण संरक्षण: राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है, जैसे कि प्रदूषण नियंत्रण और वन संरक्षण। *लाभ:* - राज्य को हरित और सुंदर बनाने में मदद मिलेगी - पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी - जल संचयन और जल संरक्षण में मदद मिलेगी - लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागर...

प्राचीन काल में ऊंचे शिखरों वाले मंदिरों का निर्माण केसे हुआ (How Ancient Temple's Built)

प्राचीन धरोहरों और मंदिरों का शिखर केसे बने जाने ----
प्राचीन काल के मंदिरों और राज प्रसादो को ऊंचे पहाड़ी शिखरों पर बना देखकर ऐसा लगता है की आखिर हमारे पूर्वजों के पास ऐसे क्या हुनर रहे होंगे की उन्होंने ऐसे महान कलाकृति बनाई है उसके उदाहरण है अंकोरवाट का मंदिर, राजा भोज मंदिर, मिस्त्र के पिरामिड,राजस्थान और दक्षिण भारत के आज से 1000 साल पुराने सभी मंदिर। जो बेसर शैली, द्रविड़ शैली और नागर शैली में निर्मित तो होते थे लेकिन उनके निर्माण में ऊंचे शिखरों और पहाड़ी पर निर्माण के समय पत्थर को पहुंचाना आखिर किस तरह होता होगा।
 तो दोस्तो पहले मंदिर और उसके निर्माण का डिजाइन बनाया जाता होगा जिससे क्षेत्र का अंदाजा हो जाए फिर वहा उच्च कारीगरों का दल बुलाया जाता होगा जो उस डिजाइन अनुरूप पत्थर और चट्टान समायोजन कर सके। मंदिर के पत्थरोको तराशकर हाथियो की सहायता से ऊपर शिखर तक पहुंचाया जाता होगा।


लेकिन शिखर तक  पहुंचने के लिए रैंप की निर्माण होता होगा जिसका ढाल बहुत कम रहता होगा जिससे इन रैम्प की लंबाई शिखर की ऊंचाई अनुसार बढ़ जाती होगी।
फिर पत्थरो को इंटरलॉकिंग के माध्यम से एक दूसरे फिट किया जाता होगा। बहुत अधिक मानव श्रम लगता था जो उस समय बलिष्ट लोग होते थे उनके लिए ये कार्य आसान रहता होगा।
 जैसलमेर किले के परकोटा इसी तरह पत्थर जोड़ जोड़ कर बनाया गया है और उसके अंदर निर्मित भवन भी इसी तरह बने है।
मिस्त्र के पिरामिड के पत्थर का आकार बड़ा था और उन्हें पिरामिडों से बहुत दूर से नील नदी में नावों के माध्यम से लाया जाता था और वहा रैंप कई किलोमीटर लंबा रहा होगा। 
प्राचीन इमारतों और धरोहरोंका जैसे निर्माण वर्तमान की अनेकों सहायताओ क्रेनो और ट्रैक्टर, और बहुत से उपयोगी समान होते हुए भी उस उत्कृष्ट कलाकृति तक पहुंचना नामुमकिन है।

टिप्पणियाँ

Talib ने कहा…
सौरमंडल। Click here ⬇️

https://studyfundaa.com/saurmandal/

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सापेक्ष वेग , सापेक्ष गति से क्या तातपर्य है ?? : infinity Studies

----------- सापेक्ष वेग , सापेक्ष गति --- रात में गाड़ी चलाते समय चकाचोंध ( On Highway ) ??   -- कोई गतिमान वस्तु हमे गतिमान दिखती है जब हम स्थिर होते है या उस वस्तु के वेग से कम वेग से गतिमान होते है तो वस्तु हमसे ज्यादा वेग से गतिमान होती प्रतीत होती है और वो हमसे आगे जाती दिखाई देती है , और यदि हम उस वस्तु से ज्यादा वेग से गतिमान होते है तो वह वस्तु हम से पीछे जाती हुई दिखती है । यह हमे सापेक्ष गति से दिखाई देती है। ये वस्तु सापेक्ष गतिमान होती है। space Discovery's यदि कोई कार में बेठे व्यक्ति है और हम बस में बेठे है और दोनों गतिमान है तब 3 परिस्तिथि हो सकती है: 1. आगे जाती हुई दिखाई देगी कार - अगर बस का वेग कार के वेग से कम है तो बस का कार से पीछे हो जायगे और कार में बेठे व्यक्ति पीछे जाते हुए दिखेगे। 2. आगे जाती हुई बस - अगर बस का वेग कार के वेग से ज्यादा है तो बस में बेठे व्यक्ति कार में बेठे व्यक्ति को आगे जाते हुए दिखाई देते है । 3 . कार और बस समान वेग से गतिमान है - अगर कार और बस का वेग समान है तो कार और बस में बेठे व्यक्ति एक दूसरे को स्थिर प्रतीत दिखाई द...

क्यों तैरते है पानी में जहाज़ : science facts

      विज्ञान की दुनिया अनोखी और रोचक है , आप इसके बारे में जितना जानो कम ही है ।      जहाज़ इतने बड़े और लोहे के बने होते है और इनका वजन कई टन में होता है लेकिन आप देखते है ये नदी हो य...

गुरुत्वाकर्षण क्या है : भारत में गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ पहाड़ी पर ऊपर बहता पानी

गुरुत्व आकर्षण नाम से ही स्पष्ट है की ' धरती के गुरुत्व के कारण आकर्षण' किन्ही दो वस्तुओ के बिच में आकषर्ण होता है यह उनके द्रव्यमान और उनके बिच की दुरी पर निर्भर करता है,    गुरुत्व के आकर्षण के कारन ही हमे भार महसूस होता है यह हमारे द्रव्यमान और गुरुत्वीय त्वरण 'g' पर निर्भर होता है इसका मान अलग अलग होता है और स्तिथि की सापेक्ष यह बदल जाता है उचाई और गहराई दोनों स्थितियों में यह बढ ज्यादा है, हमारे धरती का गुरतविय त्वरण अलग है और चाँद का अलग है इसी कारन चाँद पर स्तिथ व्यक्ति का भार धरति पर बेठे व्यक्ति की तुलना में 1/6 गुना कम होता है अब बात आती है धरती में क्या कहि पर गुरुत्वाकर्षण शून्य या कम हो सकता है तो केई भौगोलिक स्थितियों के कारन केइ जगह ये स्थितियों बन जाती है वहा पर गुरत्व कम या नगण्य हो जाए तो व्यक्ति हल्का महसूस करता है भारत में हिमाचल में उल्टा पानी जगह है वहाँ पर पानी की धरा उलटी बहती परतीत होती है वास्तव में यह हमारी आखो का भृम होता है क्योकि जहाँ हम होते है वहा से हमे पहाड़ पर चढ़ाई प्रतीत होती है लेकिन वास्तव में वह ढाल होती है ये पहाड़ी इलाको...